बॉलीवुड की वे 11 अंडररेटेड फिल्में, जिन्होंने बताया कि असली सिनेमा क्या होता है!

बॉलीवुड की वे 11 अंडररेटेड  फिल्में, जिन्होंने बताया कि असली सिनेमा क्या होता है!

भारतीय सिनेमा प्रेमियों की ये शिकायत रहती है किबॉलीवुड में उच्च स्तर के सिनेमा की हमेशा से कमी रही है.लोग मानते हैं कि यहां सिनेमा से ज़्यादा मनोरंजन पर ध्यान दिया जाता है. एक हद तक ये बात सही भी लगती और गलत भी. गलत इसलिए क्योंकि यहां ऐसी फिल्मों की कोई कमी नहीं है जो कला के दृष्टिकोण से अच्छी हों.
कमी है तो सिर्फ ऐसी फिल्मों के प्रचार प्रसार में. जब तक ऐसी फिल्मों का प्रचार नहीं होगा तब तक ये आम जनता की पहुंच से दूर रहेंगी. आज हम आपको कुछ ऐसी बॉलीवुड फिल्मों के बारे में बताएंगे जिन्हें देखने के बाद आपको अहसास होगा कि बॉलीवुड में भी ऐसी नायाब फिल्में हैं जो हमें ये बताती हैं कि आखिर असली सिनेमा होता कैसा है.

1. राम सिंह चार्ली
इंसान अपना जीवन चलाने के लिए पैसे के पीछे भागता है. पैसा आ रहा है तो सब सही है लेकिन कुछ लोग होते हैं जिनके लिए पैसा मायने नहीं रखता. वे अपने काम से इस तरह प्यार करते हैं कि अगर उन्हें उनके काम से अलग कर दिया जाए तो वे अंदर ही अंदर मरने लगते हैं. राम सिंह भी एक ऐसा ही शख्स है.

उसके जीवन में ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं कि उसे उसके अंदर के चार्ली से जुदा होना पड़ता है लेकिन वो ऐसा होने नहीं देना चाहता. राम सिंह चार्ली एक सर्कस के जोकर के अंदर बसे कलाकार को बचाने की जद्दोजहद की कहानी है. कुमुद मिश्रा जैसे प्रतिभाशाली अभिनेता ने इसमें राम सिंह का किरदार निभाया है, जिसका उपनाम चार्ली है.

फिल्म आपको बलराज साहनी की दो बीघा जमीन की याद दिलाएगी. फिल्म कितनी शानदार हो सकती है इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सोनी लिव पर उपलब्ध तमाम फिल्मों में राम सिंह चार्ली की रेटिंग सबसे ज़्यादा है. 8.1 की रेटिंग प्राप्त इस शानदार फिल्म को आप सोनी लिव पर देख सकते हैं.

2. आंखों देखी
यह कहानी है एक आम आदमी की. वो आदमी जो इतना आम है कि किसी की सोच तक में अपनी जगह नहीं बना पाता. वो खास लोगों को हर रोज़ दिखता है, कभी सड़क किनारे चलता हुआ, कभी बस में चढ़ने की जद्दोजहद करता हुआ लेकिन फिर वह किसी के ध्यान में नहीं आता.

रजत कपूर द्वारा लिखी और निर्देशित की गई यह फिल्म लोअर मिडल क्लास लोगों के जीवन की कहानी है. इस बेहतरीन कहानी में सोने पर सुहागे वाला काम किया है संजय मिश्रा के शानदार अभिनय ने.8 की रेटिंग प्राप्त इस फिल्म को आप अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं.

3. चिटगांव
ये कहना कहीं से गलत नहीं होगा कि चिटगाँव ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए सैन्य विद्रोह पर बनी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन फिल्म है. कुछ स्थानीय क्रांतिकारियों और कॉलेज के 500 छात्रों के समूह ने 18 अप्रैल 1930 को चिटगाँव के ब्रिटिश शस्त्रागार को लूट लिया. इतना ही नहीं बल्कि इन बच्चों ने कुछ दिनों तक चिटगाँव को अंग्रेजी हुकूमत से आज़ाद भी रखा.

यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह मानी गई तथा जिस प्लानिंग के साथ इस पूरी घटना को अंजाम दिया गया उसे इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा गया. बेदब्रत पेन ने इसी सैन्य विद्रोह पर यह शानदार फिल्म बनाई. फिल्म की कहानी के अलावा जो दूसरी चीज़ इसे खास बनाती है वो है इसकी स्टार कास्ट.
फिल्म में एक से बढ़ कर एक ऐसे अभिनेताओं ने अभिनय किया जिनकी तब शायद कोई खास पहचान नहीं थी लेकिन आज उनका नाम सिनेमा जगत में सम्मान से लिया जाता है. मनोज बाजपाई, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव आदि अभिनेताओं के अभिनय से सजी ये फिल्म आप अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं.

4. कामयाब
आपसे अगर पूछा जाए कि आपका फेवरेट हीरो, हीरोइन या फिर विलेन कौन है तो आपके पास एक सटीक जवाब होगा लेकिन वहीं आपसे पूछा जाए कि आपको सबसे ज़्यादा कौन सा साइड रोल आर्टिस्ट पसंद है तो निश्चित ही आपके पास जवाब नहीं होगा. मुख्य अभिनेताओं की सबको पहचान होती है लेकिन वहीं फिल्मों में काम करने वाले साइड रोल आर्टिस्ट के किरदार भले याद रखे जाएं मगर उनका नाम नहीं याद रखा जाता.

वे जब तक परदे पर होते हैं तभी तक उनकी शक्ल याद रहती है, परदे से उतरते ही वे इस भीड़ में कहीं खो जाते हैं. हार्दिक मेहता द्वारा निर्देशित फिल्म कामयाब भी एक ऐसे ही साइड रोल आर्टिस्ट की कहानी है. संजय मिश्रा के शानदार अभिनय ने इस फिल्म का कद और ज़्यादा बढ़ा दिया है. 7.9 की रेटिंग प्राप्त इस फिल्म को आप नेटफ़्लिक्स पर देख सकते हैं.

5. धनक
दो मासूम से भाई बहन छोटू और परी की ये कहानी आपके दिल को ना छूए ऐसा संभव ही नहीं. नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित यह फिल्म छोटू और परी की एक अनोखी यात्रा की कहानी है. अनोखी इसलिए क्योंकि छोटू देख नहीं सकता और उसकी बहन उसे साथ लेकर उसकी आँखों का इलाज कराने के लिए पैदल ही निकल पड़ते हैं.

उनके पास ना पैसे हैं और ना ही कोई मदद करने वाला इसके बावजूद दोनों अपना सफर जारी रखते हैं. कहीं पर दोनों की नोक झोंक है तो कहीं पर दोनों के बीच के प्रेम को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है. यह यात्रा सफल हो पाती है या नहीं, छोटू फिर से देख पाता है या नहीं ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी. 7.9 की शानदार रेटिंग प्राप्त यह फिल्म आप यूट्यूब पर मुफ़्त में देख सकते हैं.

6. शिप ऑफ थीसस
यह फिल्म हिंदी सिनेमा का एक ऐसा सफल प्रयोग है जो सालों बाद कभी होता है. आनंद गांधी द्वारा निर्देशित यह फिल्म जब 2013 में रिलीज़ हुई तब शायद ही कोई इसे देखने सिनेमाघरों में गया होगा लेकिन समय के साथ यह फिल्म हिंदी सिनेमा का एक ऐसा नायाब नगीना साबित हुई जिसे शायद सभी को देखना चाहिए.

यह फिल्म आधारित है एक ऐसे फलसफे पर जिसमें यह सवाल पूछा गया है कि अगर एक शिप के सारे पुर्जे बदल दिए जाएं तो उसकी पहचान बदल जाएगी या वही रहेगी. फिल्म में इसी फलसफे को इंसानी जीवन के साथ जोड़ा गया है. 8.1 की रेटिंग प्राप्त इस फिल्म को आप यूट्यूब पर देख सकते हैं.

7. अ डेथ इन द गंज
जिस तरह से यह फिल्म शूट की गई है और जिस तरह से फिल्म में काम कर रहे अभिनेताओं ने अभिनय किया है उस हिसाब से इसे फिल्म नहीं बल्कि कुछ लोगों की चलती फिरती ज़िंदगी माना जाना चाहिए. फिल्म एक परिवार की कहानी कहती है जो अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां अपने होमटाउन मैकलुइसगंज जाते हैं. इसी परिवार के साथ है एक 23 साल का नौजवान शुटू. शुटू इस परिवार के लिए एक खिलौने जैसा है.

हर कोई इससे काम करवाता है, इसका मज़ाक उड़ाता है लेकिन शुटू सब हंस कर स्वीकार करता रहता है. पूरी कहानी फ्लैशबैक में है जो शुरू भी एक हत्या से होती है और खत्म भी एक हत्या पर. बीच में हैं तो सिर्फ पारिवारिक रिश्तों के बीच का काला सच और मरती हुई संवेदनाएं. 7.5 की रेटिंग प्राप्त इस फिल्म को आप अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं.

8. सोनी
यह फिल्म कहानी है दो महिला पुलिस कर्मचारियों की. एक सोनी जो पुलिस मुलाजिम है और दूसरी कल्पना जो एक आईपीएस ऑफिसर है. फिल्म मुखयरूप से ये दिखती है कि किस तरह से देश की राजधानी में महिलाएं असुरक्षित हैं, खास कर रात के समय में. अपने आसपास की घटनाओं और अपने जीवन में चल रहे उतार चढ़ाव को देख कर सोनी के अंदर गुस्सा भरा पड़ा है जिसका नमूना फिल्म में बार बार देखने को मिल जाता है. इस फिल्म को आप नेटफ़्लिक्स पर देख सकते हैं.

9. द सिनेमा ट्रेवलर्स
यह कहानी है चलते फिरते सिनेमा घरों और सिनेमा के जादू की. जी हां एक समय ऐसा था जब सिनेमा हॉल एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते थे. ये कुछ इस तरह होता था कि लॉरी पर टेंट, सिनेमा रील, और प्रोजेक्टर लेकर गाँव गाँव घूमा करते थे और लोगों को सिनेमा का लुफ़्त उठाने मौका देते थे.

शर्ली अब्राहम और अमित माधेशिया द्वारा निर्देशित यह डॉक्यूमेंटरी फिल्म कितनी शानदार है इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसे कान फिल्म फेस्टिवल में स्टैंडिंग ओवेशन मिला था. इस डॉक्यूमेंटरी को आप यूट्यूब पर देख सकते हैं.

10. लंचबॉक्स
इरफ़ान खान दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन अपने पीछे वो छोड़ गए अपनी अदाकारी का जादू जिसका असर हर सिनेमा प्रेमी पर हमेशा रहेगा. उनके इस जादू से भला कौन परिचित नहीं होगा. रितेश बत्रा की लंचबॉक्स में इरफ़ान खान का शायद सबसे बेहतरीन अभिनय देखने को मिला. इस शानदार फिल्म को आप नेटफ़्लिक्स पर देख सकते हैं.

11. मसान
ऐसा कौन सिनेमा प्रेमी होगा जिस पर मसान का जादू नहीं चला. मसान जैसी ही कुछ फिल्मों के कारण मन में इस बात का संतोष रहता है कि बॉलीवुड में भी कुछ ऐसी फिल्में हैं जिन्हें देख कर हमें बॉलीवुड पर गर्व होता है. फिल्म की कहानी बेहतरीन है, निर्देशन बेहतरीन है लेकिन जो चीज़ सबसे बेहतरीन है वो है इस फिल्म के अभिनेताओं का जबरदस्त अभिनय. विक्की कौशल, ऋचा चड्ढा, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा तथा अन्य सह कलाकारों ने अपने अभिनय से इस फिल्म का स्तर बहुत ऊँचा कर दिया. इस शानदार फिल्म को आप नेटफ़्लिक्स पर देख सकते हैं.

Ronak Lakhani

Ronak Lakhani