Kiran Kumar’s Financial Constraints:किरण कुमार को पैसे की मजबूरी में करनी पड़ी अनचाही फिल्म, कहा ‘हर इंसान की जिंदगी में आता है बदलाव का दौर’

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Kiran Kumar:

Kiran Kumar कहते हैं कि हर इंसान की जिंदगी में बदलाव का दौर आता है। उस वक्त को देखकर इंसान खुद को या तो प्रमोट करता है या फिर डिमोट।

मैं इसे डिमोशन नहीं मानता हूं क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री के प्रति मेरा जुनून है। अगर मुझे खलनायक या सहायक किरदार नहीं मिलता है तो मैं किसी निर्देशक का असिस्टेंट बन जाता।

फिल्म इंडस्ट्री में करीब पांच दशक का सफर पूरा कर चुके अभिनेता Kiran Kumar अभी भी अभिनय में सक्रिय हैं। वह प्रख्यात दिवंगत अभिनेता जीवन के बेटे हैं।

बीते दिनों रिलीज फिल्म सुखी में वह नजर आए थे। बतौर हीरो काम करने के बाद, उन्होंने चरित्र अभिनेता और खलनायक की भूमिका भी निभाई।

Kiran Kumar’s Struggle Story:

हीरो बनने के बाद सहायक भूमिकाओं में आने को लेकर किरण स्वीकारते हैं कि उनकी फिल्में नहीं चली इस वजह से उन्हें सहायक भूमिकाओं को करना पड़ा।

किरण कहते हैं कि आज भी यही होता है। अगर कोई नया हीरो आता है और उसकी तीन चार फिल्में नहीं चलती हैं, तो लोग उसे भूल जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा हुआ है।

Kiran Kumar स्वीकारते हैं कि उन्होंने अपने करियर में पैसों के लिए कई ऐसी फिल्में की जो वह नहीं करना चाहते थे। हालांकि सहायक कलाकार की भूमिका करने को वह करियर में एक पायदान नीचे आना नहीं मानते। किरण के मुताबिक यह एक बदलाव का दौर होता है।

हर इंसान की जिंदगी में बदलाव का दौर आता है

हर इंसान की जिंदगी में बदलाव का दौर आता है। उस वक्त को देखकर इंसान खुद को या तो प्रमोट करता है या फिर डिमोट। मैं इसे डिमोशन नहीं मानता हूं, क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री के प्रति मेरा जुनून है।

अगर मुझे खलनायक या सहायक किरदार नहीं मिलता है, तो मैं किसी निर्देशक का असिस्टेंट बन जाता। बहरहाल, मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि मुझे मुंहमांगी फीस मिल रही है।

एक्टर Kiran Kumar ने 70 के दशक में कई फिल्मों में हीरो के रूप में काम किया था, लेकिन उन्हें बॉलीवुड ने नकार दिया। तब किरण को मजबूरी में विलेन बनना पड़ा। पिता जीवन ने किरण को सलाह दी थी कि वह मार खाएंगे तो जिंदगी में बहुत आगे जाएंगे।

बॉलीवुड में ऐसे कई एक्टर्स रहे हैं, जिन्होंने खलनायक या विलेन के किरदारों से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी, लेकिन वो हीरो बनकर मशहूर हुए। लेकिन कुछ ऐसे भी चेहरे रहे, जो बनने तो हीरो आए थे।

कुछेक फिल्मों में हीरो का रोल भी किया। लेकिन फिल्ममेकर्स को वो हीरो के रोल में नहीं जंचे और उन्हें विलेन बनना पड़ा। किरण कुमार ऐसे ही एक्टर रहे।

किरण कुमार का सपना फिल्मों में हीरो बनने का था। लेकिन किस्मत ने किरण कुमार को ‘विलेन’ बना दिया। उस समय किरण कुमार को यह बेहद खला था, लेकिन ऐसा भी दौर आया जब किरण कुमार की गिनती बॉलीवुड के खूंखार विलेन्स में होने लगी।

Kiran Kumar का 20 अक्टूबर को 69वां बर्थडे है। इस मौके पर जानिए दीपक धर नाम के उस आम आदमी की कहानी जो देखते ही देखते किरण कुमार (Happy Birthday Kiran Kumar) बना और फिर बॉलीवुड का मशहूर खलनायक।

किरण कुमार को गुजराती सिनेमा का अमिताभ बच्चन भी कहा जाता है। किरण कुमार क्यों और कैसे विलेन बने, इसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है, जो उनके पिता और मशूहर एक्टर जीवन से जुड़ा हुआ है।

इस बारे में बताने से पहले हम आपको किरण कुमार की शुरुआती जिंदगी के बारे में कुछ बातें बताने जा रहे हैं।

पापा के साथ सेट पर जाते, लगा एक्टिंग का चस्का

Kiran Kumar के पिता जीवन अपने जमाने के मशहूर एक्टर रहे। जीवन को वैसे तो सबसे ज्यादा पॉपुलैरिटी नारद मुनि के किरदार से मिली थी।

लेकिन उन्होंने खलनायिकी और विलेन के किरदारों को एक अलग आयाम दिया था। एक्टर जीवन की गिनती 60, 70 और 80 के दशक के मशहूर खलनायकों में होती थी।

किरण कुमार के बचपन का नाम दीपक धर था। जब वह छोटे थे तो पिता जीवन के साथ शूटिंग देखने फिल्म के सेट पर जाया करते थे। वहीं से किरण कुमार को एक्टिंग का चस्का लगा और उन्होंने भी हीरो बनने का फैसला कर लिया।

इसी दौरान किरण कुमार की एक दिन एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा से मुलाकात हुई। शत्रुघ्न सिन्हा तब जीवन के साथ एक फिल्म में काम कर रहे थे।
जब किरण कुमार, शत्रुघ्न सिन्हा से मिले तो उन्हें बताया कि उनके पिता की उनक बहुत तारीफ करते हैं। यह सुनकर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह तो खुद ही जीवन के बहुत बड़े फैन हैं।

किरण कुमार ने तब शत्रुघ्न सिन्हा के सामने इच्छा जाहिर की थी कि वह भी एक्टर बनना चाहते हैं। इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने उन्हें एफटीआईआई से एक्टिंग का कोर्स करने की सलाह दी।

शत्रुघ्न सिन्हा ने भी एक्टिंग का कोर्स वहीं से किया था। इस तरह किरण कुमार ने एक्टिंग का कोर्स किया और फिर रोल की तलाश में उनकी जद्दोजहद शुरू हुई।

फिल्मों में एंट्री करने से पहले किरण कुमार ने अपना नाम बदल दिया। उनका नाम दीपक धर था, लेकिन फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मां का नाम किरण अपना लिया और किरण कुमार बन गए।

70 के दशक में किए हीरो के रोल, लेकिन बॉलीवुड ने नकारा

किरण कुमार को 1960 में हीरो के तौर पर पहली फिल्म मिली, जिसका नाम ‘लव इन शिमला’ था। फिल्म हिट रही और इसके बाद किरण कुमार ने ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘दो बूंद पानी’, ‘बिंदिया और बंदूक’ और ‘इंस्पेक्टर’ जैसी कई फिल्मों में लीड रोल निभाया।

लीड रोल वाली किरण कुमार की ज्यादातर फिल्में हिट रहीं, लेकिन इंडस्ट्री ने उन्हें हीरो के रूप स्वीकार नहीं किया। इस तरह हिट फिल्मों के बावजूद किरण कुमार को एक फ्लॉप हीरो मान लिया गया।

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