चीन के हाथ लगा चंद्रमा का ‘खजाना’, अगर प्रयोग रहा सफल तो इस सेक्टर में पीछे छूट जाएंगे सभी देश

चीन के हाथ लगा चंद्रमा का ‘खजाना’, अगर प्रयोग रहा सफल तो इस सेक्टर में पीछे छूट जाएंगे सभी देश

चीन अंतरिक्ष सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौजूदा वक्त में उसका पूरा फोकस चंद्रमा पर है, जिस वजह से वो वहां पर लगातार खोजी अभियान चला रहा। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां चीनी शोधकर्ताओं ने चंद्रमा के पास ज्वालामुखी के मलबे के बीच एक नए प्रकार के क्रिस्टल की खोज की। जिसका इस्तेमाल ईंधन स्रोत के रूप में होने की उम्मीद है।

चेंजसाइट- (Y) नाम रखा चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक छोटा और पारदर्शी क्रिस्टल शोधकर्ताओं को मिला है, जिसका नाम चेंजसाइट- (Y) रखा गया। ये एक अरब साल से ज्यादा पुराना बताया जा रहा और इसकी चौड़ाई इंसानों के बाल जितनी होगी। सितंबर की शुरुआत में इंटरनेशनल मिनरोलॉजिकल एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने पुष्टि की थी कि छोटे चंद्रमा क्रिस्टल में पहले कभी नहीं देखी गई संरचना है और ये केवल चंद्रमा या उल्काओं में पाए जाने वाले अन्य खनिजों से संबंधित है।

2020 में लिए गए थे सैंपल रिपोर्ट में आगे बताया गया कि शोधकर्ताओं ने 2020 में चीन के Chang’e-5 मिशन के दौरान लगभग 4 पाउंड (1.8 किलोग्राम) चंद्र चट्टानों के बीच क्रिस्टल एकत्र किए। ये चट्टानें 1976 के बाद से पृथ्वी पर लाए जाने वाले पहले नमूने (मून सैंपल) थे। चेंजसाइट- (Y) चंद्रमा पर खोजा गया छठा खनिज है। इससे पहले की पांच खोजें अमेरिका और रूस द्वारा की गई थीं। अगर ये प्रयोग सफल रहा तो चीन को पृथ्वी पर स्वच्छ ऊर्जा का जरिया मिल जाएगा और वो भारत-अमेरिका समेत सभी देशों को ऊर्जा सेक्टर में पीछे छोड़ देगा।

हीलियम-3 भी मिला
इन सब के अलावा विश्लेषण किए गए लगभग 1,40,000 चंद्र कणों में से वैज्ञानिकों को हीलियम-3 के निशान भी मिले, जो पृथ्वी पर काफी ज्यादा दुर्लभ है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही कि इसकी चंद्रमा पर अच्छी मात्रा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक हीलियम -3 आशाजनक ईंधन स्रोत है क्योंकि ये अन्य तत्वों की तुलना में काफी कम विकिरण और कम परमाणु कचरा पैदा करता है।

वहीं चीन अब चंद्रमा पर अपने एस्ट्रोनॉट्स को उतारने की तैयारी कर रहा है। चीनी जर्नल में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक चांगई-5 लूनर मिशन के तहत चंद्रमा पर 10 से अधिक स्थल चिन्हित किए गए हैं। जहां एस्ट्रोनॉट्स को उतारा जा सकता है। नासा के अर्टेमिस-3 और चीन के चांगई-7 मिशन ने शैक्लेटॉन, हैवोर्थ (Haworth) और नोबिल क्रेटर पास लैंडिंग की जगह का चयन किया है।

Ronak Lakhani

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